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रविवार, 12 फ़रवरी 2012

माँ की चुदाई


मेरा नाम हरीश है और मेरी उम्र 20 साल की है। मई मुंबई में रहता हूँ. चोदोचुदो डॉट कॉम के सभी पाठको को मेरा नमस्कार ! मेरे फ्लैट में मै एवं मेरे माँ बाप के अलावा कोई नही रहता। एक साल पहले बाइक चलाते वक्त मै गिर गया और मेरे दोनों हथेली में काफ़ी जख्म हो गए। डॉ० ने मेरे दोनों हथेलियों में एक महीने के लिए बेंडेज कर दिया। अब मै अपना कोई काम ख़ुद से नही कर सकता था। सबसे अधिक दिक्कत मुझे बाथरूम जाने में हुई। क्योंकी मेरी पांचो उँगलियाँ पट्टी से बंधी थी. पहले दिन तो मेरे पापा ने मुझे बाथरूम कराया एवं सफाई भी की। लेकिन अगले ही दिन उन्हें जरूरी काम से जयपुर जाना पड़ गया। अब फ्लैट में मेरी माँ और मै ही बच गए। मेरे पापा तो नही जाना चाहते थे लेकिन जब माँ ने कहा की वो संभाल लेगी तो वो चले गए। अगले दिन जब मझे बाथरूम जाना था तो समझ में नही आ रहा था की कैसे जाऊं। मैंने कुछ नही कहा। लगभग दस बजे मेरी मम्मी ने कहा – तुम बाथरूम नही गए? मैंने कहा – धोऊंगा कैसे? माँ ने कहा – जब तुम बच्चे थे तो कौन धोता था? आज भी मै धो दूंगी। पहले तो मै नही माना। माँ ने गुस्से में आ कर कहा – मुझसे शरमाते हो? वो अचानक खड़ी हुई और अपना गाउन उतार दी। अन्दर उसने पेंटी और ब्रा पहन रखी थी। झटके में अपना ब्रा उतार दी और बोली – यही वो स्तन है जिससे तुने ढाई साल तक दूध पिया है। तू कहाँ से आया वो देखना चाहता है? कहते हुए माँ ने अपनी पेंटी भी उतार दी और अपने चूत की तरफ़ इशारा करते हुए बोली- इसी से तू निकला है। देख, मुझे शर्म नही आती और तुझे कैसी शर्म? जब मै तुम्हारे सामने नंगी हो सकती हूँ तो तुम्हे क्यों आती है? मै हक्का बक्का हो कर माँ को देख रहा था। वो पूरी तरह से नंगी मेरे सामने खड़ी थी। बड़े - बड़े स्तन और बड़ा सा चूत काले काले घने बालों से ढके हुए मेरे सामने थे। थोड़ी देर मै शांत रहा एवं नजरें झुका कर बोला- आई ऍम सोरी मम्मी। अब मै आपसे नही शर्माऊंगा आप प्लीज़ कपड़े पहन लें। माँ ने अपने सारे कपड़े पहन लिए और मुझे बाथरूम ले कर गई। वहां माँ ने मेरे सारे कपड़े उतरे और मुझे नंगा कर दिया और टोइलेट सीट पर बैठ जाने को कहा और बोली- जब हो जाएगा तो मुझे बोलना। अब मुझे माँ के सामने नंगा होने में कोई शर्म नही आ रही थी। थोड़ी देर में जब मैंने पैखाना कर लिया तो मैंने माँ को आवाज़ लगाई। वो बाथरूम में आई और मुझे नल के पास ला कर अपने हाथो से मेरे गांड की सफाई उसी तरह की जिस तरह मेरे बचपन में वो मेरी गांड धोती थी। मेरी सफाई करने के बाद मेरे सारे कपड़े पहना कर मुझे बाहर भेज दिया और ख़ुद बाथरूम में स्नान करने लगी। मै बाहर आ कर काफ़ी हल्का महसूस कर रहा था। अब मै खुश था। अगले दिन जब मै बाथरूम गया और पैखाना करने के बाद माँ को आवाज़ लगाई तो माँ अन्दर आ कर अपना गाउन उतार दी। बोली – तेरे धोने के कारण पानी पड़ने से गन्दा हो जाता है। वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में रहते हुए मेरी गांड की सफाई की। अब यह क्रम रोज़ का हो गया। 3-4 दिनों के बाद पापा का फ़ोन आया कि उन्हें यहाँ 22-25 दिन और लग सकता है। 5 दिन के बाद मै सो कर उठा तो देखा की रात में सोने में ही नाईट फाल हो गया (मेरे लिंग से माल निकल गया ) था। मै बहूत असहज महसूस कर रहा था। क्योंकि आजकल मेरे सारे कपड़े मेरी माँ ही साफ़ करती थी। फ़िर सोचा, माँ पूछेगी तो बता दूँगा। जब बाथरूम में माँ मेरे कपड़े उतार रही थी तो मेरे अंडरवियर में मेरा वीर्य देखा। बोली- ये क्या है? मैंने नजरे झुका के कह दिया- वो, रात को कुछ हो गया होगा। माँ समझ गई और थोड़ा मुस्कुरा के बोली- अरे, तू तो जवान हो रहा है। चल कोई बात नही मै साफ़ कर दूँगी। कह के वो बाहर चली गई। जब मै पैखाना कर रहा था तो मेरी मुठ मारने की काफ़ी इच्छा होने लगी। क्योंकि पिछले कई दिन से मैंने मुठ नही मारी थी। लेकिन मन मसोस के रह गया। क्योँकी मेरे हाथ पट्टियों से बंधे थे। लेकिन मेरे लिंग में कडापन आ गया जो ख़तम ही नही हो रहा था। किसी तरह से वो थोड़ा मुरझाया तो मैंने माँ को आवाज़ दी। माँ जब मेरी गांड की सफाई करने लगी तो मेरा लिंग खड़ा हो गया। माँ ने मुझे अंडरवियर पहनाते हुए मेरे लिंग को देखा। लेकिन कुछ बोली नही। मै किसी तरह से बाहर चला आया। अगले दिन मेरे लिंग की हालत एक दम ख़राब हो गई थी। यह बिना मुठ मारे शांत ही नही हो रहा था। मन कर रहा था की किस तरह से मुठ मारूं। जब मेरे कपड़े माँ ने उतारे तो ये तन के खड़ा हो गया। मै झट से दूसरी और घूम गया ताकि माँ मेरे खड़े लिंग को ना देख पाये। लेकिन माँ ने देख लिया था। वो बोली – आज तुम पैखाना करने के बाद नहा कर ही बाहर जाना. मै तुझे ठीक से नहला भी नही पाती हूँ। जब मैंने माँ को आवाज़ लगाई तो वो आई और नल पे मेरा गांड साफ़ करने के बाद. बोली- नहा भी लो। माँ सिर्फ़ पेंटी और ब्रा पहन रखी थी। मेरा लिंग एकदम टाईट हुआ जा रहा था। माँ ने मेरे शरीर पर पानी डाल कर मेरे बदन को रगड़ना शुरू किया तो मेरे लिंग को छू कर कहा इतना टाईट क्यों कर रखा है इसे? मैंने कहा- तुम नही समझोगी। माँ को तुरंत गुस्सा आया गया और बोली- अभी भी मुझसे शर्माता है। कह कर अपने ब्रा और पेंटी को खोल दिया॥ अब हम दोनों बिलकूल नंगे बाथरूम में खड़े थे। माँ ने मेरे लिंग को पकड़ के कहा – बता क्या बात है? अब इस स्थिति में कुछ भी छुपाने लायक नही था। मैंने कहा कि पिछले कई दिनों से मुठ नही मारा है इसलिए ये टाईट हो गया है। माँ बोली- पहले बोलना चाहिए था ना? ला मै मार देती हूँ। मैंने कहा- तुम , लेकिन …… ???। माँ ने मेरी बात बीच में ही काटते हुए कहा – जब तेरी गांड धो सकती हूँ तो तेरी मुठ क्यों नही मार सकती। मैंने कहा – ठीक है। माँ ने मेरे लिंग पर नारियल तेल लगाया। और इसे सहलाने लगी। मेरा लिंग और भी बड़ा हो गया। माँ के स्तन और चूत को सामने देख मुझे काफ़ी गर्मी चढ़ गई। माँ ने मेरे लिंग को अपने हाथ से मुठ मारना शुरू कर दिया। पहली बार कोई अन्य मेरे लिंग का मुठ मार रहा था। 20-25 बार ही माँ ने मेरे लिंग को आगे- पीछे किया होगा की मेरे लिंग ने माल की पिचकारी छोड़ दी जो सीधे माँ के पेट पर जा कर गिरी। मै सिसकारी मारने लगा। अब जा कर मेरा लिंग शांत हुआ। माँ ने अच्छी तरह नहलाया और बाथरूम के बाहर भेज दिया। अब मै काफ़ी शांत था। सारा दिन सामान्य स्थिति में गुजर गया। इतना होने के बावजूद मेरे लिए माँ के लिए कोई ग़लत भावना नही आई थी। अगले दिन सुबह माँ ने मुझे पैखाना के बाद फिर से नहलाने लगी। माँ ने अपने सारे कपड़े उतार रखे थे। लेकिन मेरे लिंग में उनके स्तन और चूत को देख कर कोई तनाव नही था।साबुन लगाने के क्रम में माँ मेरे लिंग पर विशेष रूप से सहलाने लगी। जिससे मेरे लिंग में हल्का तनाव आ गया। माँ बोली- आज मुठ नही मारना है? मै बोला- वैसे तो जरूरत नही है लेकिन अगर तुम्हे दिक्कत नही हो तो मार दो। माँ ने कहा – आज तेरी मुठ मै दूसरे तरीके से मारूंगी। मै बोला – ठीक है। माँ नीचे बैठ गई और मेरे लिंग को अपने मुह में ले कर चूसने लगी। मैंने कहा- माँ ये क्या कर रही हो? माँ बोली- देख तो सही। माँ ने मेरे लिंग को इस तरह से चूसना चालू किया मानो वो कोई लोलीपोप हो। मुझे अत्यधिक आनंद आ रहा था। मेरे लिंग पूरे आकार में खड़ा था। माँ ने मेरे लिंग को चूसना जारी रखा। 2 मिनट के बाद मेरे लिंग से माल निकलने लगा। मैंने कहा- माँ अब मेरे माल निकलने वाला है। छोड़ दो इसे। लेकिन वो मेरे लिंग को और कस के पकड़ ली और अपने मुह में अन्दर तक ठूस ली। मेरे लिंग से माल निकलने लगा और माँ सारे माल को पीती रही। कुछ माल माँ के मुह से बाहर भी आ रहा था। मै मस्त हो रहा था। जब कुछ शांत हुआ तो माँ ने मेरी लिंग को अपने मुह के कैद से आज़ादी दी । वो खड़ी हो गई और बोली- कैसा लगा बेटा? मैंने कहा- अच्छा लगा। माँ ने कहा- आज मेरी भी इच्छा पूरी कर दे। जिस जगह से तेरा पूरा शरीर निकला है आज तुझे अपने शरीर का एक भाग फिर से डालना है। मै समझ गया की माँ क्या चाहतो है। मै बोला – ठीक है। माँ बाथरूम के ज़मीन पर लेट गई। और मुझे अपने बदन पर लेट जाने को कहा। मै उनके शरीर पर लेट गया। माँ की जिन स्तन को मैंने 16-17 साल पहले छोड़ दिया था आज फिर से उन स्तनों को अपने मुह में लिया। और उन्हें चूसने लगा। काफ़ी देर तक चूसने के बाद मैंने उनके बदन को चूमना आरम्भ किया। चुमते - चुमते उनके चूत को भी अपने मुह से चुसना शुरू कर दिया। माँ की मुह से हलकी - हलकी सिसकारी निकल रही थी। बोली- बेटा, अब ना तरसाओ, और फिर से उसी चूत में अपना लिंग डाल के अपने ऊपर का क़र्ज़ मिटाओ जिस चूत से तू आज से 19 साल पहले निकला था। मेरा लिंग अब पूरी तरह टाईट था। मैंने कहा -किधर और कैसे डालना है मुझे पता नही है। माँ ने अपनी दोनों पैरो को खोल दिया। एवं अपने उँगलियों को अपनी चूत में घुसाया और बोली- देख, इसी में डालना है। मैं माँ की चूत को गौर से देखा। माँ की चूत घने बालों से ढकी थी। अन्दर एक छेद दिख रहा था। मुझे यकीन नही हो रहा था की इसी छेद से मै बाहर आया था। माँ बोली- क्या सोचने लगा। मैंने कहा- इतने से छेद में मेरा इतना बड़ा लिंग जाएगा? माँ बोली- अरे इस छेद से तो तू निकला है तेरे लिंग की क्या बिसात। चल डाल। मैंने माँ की जाँघों को थोड़ा और चौड़ा किया। लेकिन मेरा लिंग मेरे काबू के बाहर हो रहा था। वो लहराते हुए बांस की तरह इधर उधर बाग़ रहा था। किसी तरह माँ के योनी पर मैंने अपना लिंग रखा। जब उसे अन्दर डालने की कोसिस की तो लिंग से निकला चिकने की वजह से वो आगे फिसल गया। माँ ने मेरे लिंग को अपने हाथो से पकड़ा और अपनी योनी की द्वार पर रख दिया बोली- अब घूसा। मैंने सावधानीपूर्वक अपने लिंग को माँ की यानि में प्रवेश करा दिया। सचमुच माँ की चूत बहूत ही गहरी और मुलायम थी। तभी तो मेरे सारे लिंग को अन्दर लेने के बाद भी वो आनंदित हो रही थी। मैंने अपना पूरा लिंग माँ की चूत में डाल दिया। अब मेरी माँ के चूत के बाल और मेरे लिंग के बाल आपस में उलझ गए थे। मैंने थोड़ी सी अपनी लिंग को बहार निकाला और फिर अन्दर धकेला। लेकिन माँ में चेहरे पर दर्द का भाव नही आया। मुझे अब कोई फिक्र नही थी। मैंने अब अपनी स्पीड बढाया । अब मै माँ के चूत में जोर लगा लगा के कस के लंड के धक्के मरने लगा। मेरे धक्के से माँ को थोड़ी तकलीफ होने लगी। बोली- बेटा धीरे धीरे। लेकिन अब मुझे इस बात का गर्व हो गया था की मै भी आपको ऐसे छोड़ सकता हूँ की आपको दर्द होने लगे। माँ ने जब देखा की मै नही मान रहा हूँ तो वो मुस्कुरा कर अपने दोनों पैरों को और भी ज्यादा खोल दिया। शायद इस से उनका दर्द कुछ कम हो गया। मै माँ के चूत में धक्के पे धक्के मार रहा था और वो हर धक्के पर सही सही ..कर रही थी। मैंने अपने बांह से अपनी माँ को लपेट लिया था जिस से माँ के स्तन मेरे सीने से चिपके हुए थे। चूँकि थोड़ी ही देर पहले माँ ने मेरे लिंग को चूस कर मेरा माल बाहर नाकाला था इसलिए इस बार मेरा लिंग जल्दीबाजी में माल निकालने को तैयार नही था। अचानक मेरे लिंग को अहसास हुआ की माँ के चूत में गरम गरम पानी निकल रहा है। मैंने माँ को देखा वो आँखे बंद कर ना जाने किस आनंदलोक में उड़ रही थी। काफ़ी देर माँ को चोदने के बाद भी मेरे लिंग से माल नही निकलने लगा तो माँ ने कहा ला मै तेरा माल निकलवा देती हूँ. मैंने लिंग को बाहर कर लिया और माँ ने उसे अपने मुह में ले कर फिर से चूसने लगी। थोड़ी ही देर में मुझे लगा की अब शायद माल फिर जमा हो गया है। मैंने माँ को कहा -ला , अब हो जाएगा। मैंने फिर से अपने लिंग को माँ के चूत के पास ले गया। माँ का चूत का मुह अभी भी फैला हुआ ही था। इसलिए मुझे अपना लिंग उसमे डालने में कोई परेशानी नही हुई। अब मै अधिक तेजी से माँ के चूत को चोदना शुरू किया। १० मिनट के बाद ही मेरे लिंग से माल की धारा फूटने वाली थी। मैंने माँ को कहा- अब निकलने वाला है। कहाँ निकालूँ? माँ बोली- चूत में ही माल गिरा दे। माँ के कहते कहते मेरे लिंग से माल का फव्वारा निकल के माँ के चूत में सामने लगा। पता नही कितना गहरा था माँ का चूत। सारा का सारा माल अन्दर में कहाँ चला गया पता भी नही चला। एक बूंद भी बाहर नही आई। मै निढाल हो कर माँ के स्तन पर अपना मुह रख के लेट गया। थोड़ी देर के बाद माँ ने ही मुझे सहायता दे कर उठाया। वो समझती थी की 19 साल के लड़के से दो बार माल तुरंत तुरंत निकलवाया जय तो क्या हाल होगा बेचारे का। वो भी पहला अनुभव में। उस दिन के बाद से माँ और मेरे बीच जो शारीरिक रिश्ता बना है वो आज भी मेरे पिता की नजरों से छिप के बदस्तूर जारी है। हर 1-2 दिन के बाद माँ मेरे कमरे में आकर मेरे साथ सेक्स करती है। या तो जब मेरा मन होता है तो माँ को उनके बेडरूम में जा कर चोद आता हूँ। कई बार तो माँ मेरे पिता से सेक्स करने के बाद बिना अपने चूत से पापा का माल साफ़ किए नंगे बदन ही मेरे रूम में आ जाती है । और उसी में मुझे चोदने को कहती है।

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